बदनसीब महिला

कौन थी दुनिया की सबसे बदनसीब महिला?

 इस फैक्ट में हम जानेंगे दुनिया की सबसे बदनसीब मॉडल की कहानी। क्या कोई इंसान इतना भी बदनसीब हो सकता है की उसे मरने के 192 साल बाद भी कब्र ना नसीब हुई हो। अगर आप सोचते थे नहीं तो मैं आपको बता दूँ सारा बार्टमैन ऐसी ही एक बदनसीब महिला थी जिसका जन्म 1789 में दक्षिण अफ्रीका के पूर्वी केप में हुआ था।

जन्म के समय से ही सारा की बॉडी बांकी लोगों से अलग थी नितम्भ बांकी बच्चों से बड़े थे और जैसे-जैसे वह बड़ी हुई उसके नितंब उसके शरीर के अपेक्षा काफी बड़े होते चले गए। बचपन में ही उसके माता पिता गुज़र गए जिसके बाद एक अंग्रेज विलियम डनलप को लगा कि अगर वह सारा बार्टमैन को लंदन ले जाकर उसका शो करें तो उसे काफी कमाई होगी। उसके बाद वह अंग्रेज सारा को लेकर ब्रिटैन चला गया जहां सारा बार्टमैन का कई अखबारों में उसके बेडौल शरीर का कार्टून बनाकर मजाक उड़ाया गया। 1807 में ब्रिटिश साम्राज्य ने गुलामों के व्यापार को खत्म कर दिया।लेकिन सारा की दुःख भरी दास्ताँ यहाँ भि ख़त्म नहीं हुई ।

 उसके मालिक ने उसे फ्रांस के एक सर्कस वाले को बेच दिया और वह फ्रांसीसी सर्कस वाला भी उसके बेडौल शरीर का प्रदर्शन करके पैसा कमाने लगा। फिर कुछ सालों बाड़फ्रांस की राजधानी पेरिस में मात्र 26 साल की उम्र में सारा बार्टमैन की एक स्टेज शो के दौरान मौत हो गई। लेकिन अफसोस देखिए कि उसकी मौत के बाद भी स्टेज शो का कार्यक्रम रद्द नहीं हुआ और जारी रहा। हद तो तब हो गयी जब फ्रांसीसी लोगों ने मरने के बाद भी सारा बार्टमैन के शरीर के साथ जो किया वह मानवता का सबसे बड़ा मजाक था जिसकी वजह से ही सारा बैट मैन को दुनिया की सबसे बदनसीब महिला कहा जाने लगा। मरने के बाद उसके बड़े बड़े नितंबों और प्राइवेट अंगों को प्रिजर्व कर फॉर्मलीन में बंद कर एक म्यूजियम में रख दिया गया।

इतना ही नहीं उसी म्यूजियम में सारा बार्टमैन के शरीर का प्लास्टर कास्ट बनाकर प्रदर्शन के लिए रखा गया।सोचिए मरने के बाद एक महिला का इस तरह से अपमान पूरे विश्व में कहीं नहीं हुआ होगा। फिर जब 1994 में नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने तब उन्होंने फ़्रांसीसी सरकार के सामने सराह बार्टमैन के अंगों के अवशेष और उसके प्लास्टर कास्ट के प्रत्यावर्तन का अनुरोध किया।नेल्सन मंडेला की कईं कोशिशों के बाद फ्रांसीसी सरकार सहमत हो गई और मार्च 2002 में सराह वर्टमैन के शरीर के सभी अवशेष और उसके प्लास्टर कास्ट को दक्षिण अफ्रीका को सौंप दिया गया जिसके बाद सराह वर्टमैन की मौत के कुल 192 साल के बाद उसके जन्म स्थान पूर्वी केप प्रांत में राजकीय सम्मान के साथ दफन कीया गया।

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